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शिक्षा की स्तिथि हुई बदतर

बालिकाओं को पढ़ाने और आगे बढ़ाने की गरज से प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय करगहर में शिक्षा मदद जैसी योजनाएं चलायी जा रही है। दूसरी ओर बालिकाओं को जिस तरह के विद्यालयों में पढ़ना पड़ रहा है। उससे उनके साथ भेद नजर आता है। प्रोजेक्ट बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी दिन कोई हादसा हो सकता है।

मालूम हो कि स्थानीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भवन 5 दशक से भी ज्यादा पुराना है और देखरेख के अभाव में इसके भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है। कि ऐसा लगता है कि पता नहीं कब गिर जाये। कमरे की छत टूटी पड़ी है। पानी का निकास न होने की वजह से जलभराव स्थायी हो चुका है। कई वर्षो से विद्यालय की रंगाई-पुताई नहीं हुयी है। यहां तक कि मेजें-कुर्सियां भी टूटी पड़ी है। ऐसा नहीं है कि विद्यालय में नवमी तथा दसवीं की 212 बालिकाओं का यहां पंजीकृत है। और पांच अध्यापक यहां तैनात है। 10+2 में 9 शिक्षक तथा 5 अतिथि शिक्षक है। हालांकि इंटर स्तरीय विद्यालय का भवन नया है पर देखरेख रंगाई पुताई ना होने के कारण यह भी खंडहर के जैसा लगता है। लेकिन इसके बावजूद इस विद्यालय की दशा की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रभारी प्रधानाध्यापक अरूण कुमार सिंह के अनुसार विभाग की ओर से विद्यालय के भवन के लिए धन नहीं मिला है जिसकी वजह से कोई काम नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि 10+2 के लिए इमारत तो बनी पर नवम तथा दसवीं क्लास के लिए विद्यालय की जमीन पड़ी है. परंतु इमारत नहीं बन पायी है। उन्होंने कहा कि अब वे फिर से अधिकारियों से इसके लिए मांग करेगे।

लेट आते तथा पहले जाते हैं शिक्षक

विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना सरकारी प्रयास के बावजूद पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसमें खास बात यह है कि जिसके बूते इसका सपना देखा जा रहा है वही शिक्षक इसमें सबसे बड़ा बाधक बने हैं। लेट आने और समय से पहले घर जाने की ललक ने सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को चौपट कर दिया है। जब समस्याओं के बाद प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय के विधि व्यवस्था की पड़ताल की गई तो पाया गया।

शिक्षक तो गायब मिल ही रहे हैं विद्यालय प्रधान भी बिना किसी सूचना के गायब मिल रहे हैं। जिसमें दर्जनों शिक्षक फरार थे। हद तो तब हो गई जब मनमानी तरीके से विद्यालय में एक एक करके शिक्षकों का आगमन होने लगा सुबह 7:00 बजे से की जा रही पड़ताल में पाया गया कि 4 शिक्षक अपने समय से विद्यालय में मौजूद थे,,जिसमें रविंद्र कुमार सिंह कुशवाहा, सुभाष चंद्र सिंह, आरती सिंह तथा श्याम सुंदर सिंह इन लोगों ने चेतना सत्र के दौरान विद्यालय में प्रार्थना कराई. लेकिन चेतना सत्र के दौरान दिए जाने वाले आवश्यक जानकारी बच्चियों को नहीं दी गई। शिक्षा विभाग के आदेश अनुसार लाउडस्पीकर का भी प्रयोग नहीं किया गया। 7:30 में 2 शिक्षक कंचन कुमारी तथा साजिदा तबस्सुम विद्यालय पहुंची, जिसके बाद 7:37 में बब्लू सिंह, 7:55 में अर्जुन कुमार पासवान, संतोष कुमार सिंह तथा 8:05 पर शोभा कुमारी, बबीता मिश्रा, वहीं 8:16 में कृति रंजन, 8:22 में अमृता सिंह। हद तो तब हो गई जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण कुमार सिंह अपने सहयोगी शिक्षक प्रेम प्रकाश चौबे के साथ 8:30 में विद्यालय पहुंचे। जब शौचालय की पड़ताल की गई तो उस में पाया गया कि विद्यालय परिसर में सिर्फ एक ही शौचालय है जिसमें सभी छात्राएं, शिक्षक तथा शिक्षिकाएं प्रयोग करती हैं। शिक्षिकाओं ने विरोध जताते हुए कहा कि शौचालय शिक्षकों के लिए अलग नहीं होने के कारण काफी असुविधा होती है, बार-बार कहने के बावजूद भी प्रधानाध्यापक के द्वारा शौचालय के प्रति ध्यान नहीं दिया जाता है। शौचालय काफी गंदा रहता है। सूत्र बताते हैं कि अधिकारी निरीक्षण के बाद स्पष्टीकरण पूछते हैं और उसका जबाव मैनेज सिस्टम से उन्हें दे दिया जाता है। यह एक विभागीय परंपरा बनते जा रही है जिससे सरकार की योजना पूरी होगी, इसका अंदाजा किया जाना ही बेईमानी साबित होगी। जब शिक्षकों से लेट आने के बारे में पूछा गया तो सभी ने ट्रैफिक जाम होने का कारण बताया, वहीं प्रधानाध्यापक ने एक अलग ही जवाब दिया उन्होंने कहा कि शादी विवाह छोड़ दें।

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