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दरभंगा बिहार

विधायक सरावगी के प्रस्ताव पर गोलबंद हुए सदस्य

सिंडिकेट के प्रोसिडिंग में हेरा-फेरी व विश्वविद्यालय को नियम-परिनियम के तहत नहीं चलाये जाने के विरोध में आज सिण्डीकेट की बैठक में काफी हंगामा हुआ। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय सिण्डीकेट की बैठक कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज सम्पन्न हुई। बैठक के शुरूआत में ही विधायक सह सिण्डीकेट सदस्य संजय सरावगी ने व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है यहां से लोगों को सदाचार सिखाया जाता है, लेकिन शिक्षा के मंदिर में ही बैठक कर गलत कार्य एवं प्रोसिडिंग में हेरा-फेरी हो तो फिर सिण्डीकेट की बैठक का औचित्य क्या है। श्री सरावगी ने आरोप लगाया कि पिछली बैठक में लिये गये निर्णय को पूरी तरह हटा दिया गया है।

उन्होंने कहा कि दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सहायक कुलसचिव की नियुक्ति और उनके द्वारा दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को दिये गये निजीकरण के प्रस्ताव पर पिछले सिण्डीकेट में जांच कमिटी बनाई गयी थी। लेकिन प्रोसिडिंग से उसे हटा दिया गया। ऐसे में सिण्डीकेट की बैठक का औचित्य क्या है। उन्होंने कहा कि ऐसा करना अपराधिक मामला बनता है। श्री सरावगी ने कहा कि अब बैठक के साथ-साथ ही प्रोसिडिंग लिखा जाय और हमलोग बैठक के बाद हस्ताक्षर करेंगे। चाहे इसके लिए जो समय लगे। श्री सरावगी के प्रश्न पर विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी, पूर्व विधान पार्षद प्रो. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू और डॉ. हरिनारायण सिंह ने भी समर्थन किया। डॉ. दिलीप कुमार चौधरी ने कुलसचिव कर्नल निशीथ कुमार राय को संबोधित करते हुए कहा कि रेकॉर्ड के कस्टोडियन कुलसचिव होते हैं। ऐसे में सारी जवाबदेही आपकी बनती है।

वहीं सिण्डीकेट सदस्य डॉ. हरिनारायण सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर वित्तीय धारा और परीक्षा की धारा को उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अधिनियम में नियुक्ति, निलंबन, बर्खास्तगी सिण्डीकेट की मंजूरी आवश्यक है और कुलपति का दायित्व बनता है कि सिण्डीकेट के निर्णय को कुलपति लागू करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के नियम-परिनियम के अन्तर्गत वित्त के धारा-45 का और परीक्षा की धारा-22 का उल्लंघन हुआ है। डॉ. सिंह ने कहा कि धारा 11 के ए, बी, सी के तहत कारवाई हो और मेरा आपत्ति दर्ज की जाय। वहीं मामला काफी गर्म हो जाने के बाद कुलानुशासक सह सिण्डीकेट सदस्य प्रो. अजीत कुमार चौधरी ने कुलपति से आग्रह किया कि पिछले निर्णय को अधिसूचित कर दिया जाय और आगे की कारवाई की जाय। जिस पर कुलपति ने कहा कि ठीक है, लेकिन सदस्य इस बात पर नहीं माने। सदस्यगण तत्काल अधिसूचना चाह रहे थे। कुलपति ने तत्काल अधिसूचना की बात मान ली। तब जाकर बैठक चल सकी। वहीं स्कूल गुरु को लेकर यू0जी0सी0 के पत्र के आलोक में गठित पाँच सदस्यीय कमिटी के प्रतिवेदन को सिण्डीकेट ने स्वीकृति प्रदान की।

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