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बिहार के ये आपका सांसद बोलता ही नहीं है…

सेंट्रल डेस्क : मुकेश कुमार : हम – आप 2020 में हैं. साल 2019 में बिहार ने नए 40 सांसद चुने थे 17वीं लोकसभा के लिए. सोचा था, लोकसभा में बोलेंगे. सवाल पूछेंगे. देश – प्रदेश – क्षेत्र की बात करेंगे. 17वीं लोकसभा में सांसदों के अब तक के परफार्मेंस पर पहली रिपोर्ट आई है. पीआरएस इंडिया डॉट ओआरजी की वेबसाइट पर लेखा – जोखा है. आज जानिए, बिहार के छह सबसे लचर सांसदों की रिपोर्ट कार्ड.

राधामोहन सिंह
रिपोर्ट देख – जान चौंक जायेंगे कि बिहार के अभी सबसे मूक सांसद मोतिहारी के बीजेपी एमपी राधामोहन सिंह हैं. पता नहीं, संसद में मौनी बाबा क्‍यों हो गए हैं. मंत्री नहीं बनने की निराशा तो नहीं है. तो, सच ये है कि राधामोहन सिंह ने अब तक संसद में मुंह नहीं खोला है. न डिबेट – न सवाल – न प्राइवेट बिल इनके नाम है.

महबूब अली कैसर
खगडि़या के लोजपा सांसद महबूब अली कैसर भी ‘ चुप ही रहो ’ वाले कैटेगरी में शामिल हैं. 16वीं लोकसभा में भी कमोबेश ऐसे ही थे. 17वीं लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद कैसर सिर्फ एक बार बोले हैं. इनके नाम डिबेट – जीरो, क्‍वेश्‍चन – एक और प्राइवेट बिल – जीरो लिखा है.

पशुपति कुमार पारस
पहली बार सांसद बने हाजीपुर के लोजपा सांसद पशुपति कुमार पारस की रिपोर्ट भी ठीक नहीं है. हालांकि, वे बिहार में सांसद बनने के पहले कई दफे मंत्री थे. पारस ने लोकसभा में बहुत ही कम बोला है. इन्‍होंने सिर्फ एक डिबेट में हिस्‍सा लिया और मात्र तीन सवाल पूछे. प्राइवेट बिल की ओपनिंग नहीं है.

अशोक कुमार यादव
पिछले कई लोकसभा में देश ने मधुबनी के सांसद रहे हुकुमदेव नारायण यादव को शानदार तरीके से बोलते देखा था. जमीनी मुद्दे उठाते थे. लेकिन, विरासत को आगे बढ़ाते मधुबनी से ही 17वीं लोकसभा के लिए चुने गए इनके बेटे भाजपा सांसद अशोक कुमार यादव की अब तक की रिपोर्ट कार्ड बहुत ही लचर है. बस एक सवाल पूछा और छह डिबेट में भाग लेकर अब तक की पब्लिक ड्यूटी कर ली है खत्‍म.

बैद्यनाथ प्रसाद महतो
वाल्‍मीकिनगर के जदयू सांसद बैद्यनाथ प्रसाद महतो भी पब्लिक ड्यूटी कम ही बजा रहे हैं. वैसे तो सांसद ये पहले भी रहे हैं. फिर भी, 17 वीं लोकसभा में अब तक इन्‍होंने मात्र पांच सवाल और तीन डिबेट में ही भाग लेना मुनासिब समझा है.

कविता सिंह
सीवान की जदयू सांसद कविता सिंह की रफ्तार भी संसद में बहुत धीमी है. अटेंडेंस 79 फीसदी है. लेकिन, सवाल पांच और डिबेट में कुल हिस्‍सेदारी अब तक सिर्फ तीन ही है.

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