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गरीब कल्याण योजना डबल इंजन सरकार का चुनावी जुमला है- एजाज अहमद

जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि गरीब कल्याण योजना चुनावी जुमला के अलावा कुछ और नहीं है, क्योंकि जहां एक ओर बिहार में डबल इंजन की सरकार मजदूरों का विश्वास बहाल करने में पूरी तरह से नाकाम रही, वहीं दूसरी ओर फिर से लोगों का पलायन शुरू हो गया है।

इन्होंने कहा कि बिहार में चुनाव को देखते हुए ही गरीब कल्याण के नाम पर योजना लाकर लोगों को भ्रमित और मजदूरों के साथ हुए जुल्म – अत्याचार की घटनाओं से ध्यान भटकाने का प्रयास मात्र है।

जिस तरह से लॉकडाउन के समय मजदूरों को अपने घर आने में कठिनाइयों और दुखों का जो पहाड़ टूटा ,उसका वर्णन करने से ही सिहरन हो जाता है । इतना ही नहीं भूख ,बेबसी और तड़प के कारण मजदूरों ने जो कठिनाई झेली है उसके प्रति डबल इंजन की सरकार का मन नहीं पसीजा और मजदूरों को उसके हाल पर ही छोड़ दिया गया। और मजदूरों के लिए ना तो कोई रोजगार की व्यवस्था की गई और ना ही उनके परिवार के जीने के लिए कोई व्यवस्था ही हुई । जिस कारण मजदूर फिर से पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं । मजदूर जब पैदल चलकर अपने पैरों में छाले और भुखमरी के कारण मौत के गाल में समा रहे थे तब ञना तो

केंद्र सरकार का और ना ही राज्य सरकार का इस ओर ध्यान गया कि गरीबों का कल्याण कैसे किया जाए, लेकिन जैसे ही बिहार में चुनाव का बिगुल बजा वैसे ही मजदूरों के कल्याण की यादें मोदी और नीतीश के मन मे हिलकोरे मारने लगी। भूख और दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के परिवार को सरकार की ओर से कोई सहायता राशि नहीं दी गई लेकिन अब कोरी घोषणाओं के सहारे गरीबों के कल्याण के लिए बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं।
एजाज ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अगर सही में गरीबों का कल्याण चाहते हैं तो उन्हें गरीबों के खाते में नगद दस हजार की राशि के अलावा उनको रोजगार के साधन के लिए अलग से बिना किसी सूद और ब्याज के छोटा- मोटा धंधा शुरू करने के लिए और उन्हे आत्मनिर्भर बनने के लिए

सरकार कम से कम एक लाख की राशि उपलब्ध कराये। सिर्फ चुनावी जुमलाबाजी से गरीबों का कल्याण नहीं हो सकता है ,इसके लिए धरातल पर काम करने की आवश्यकता है। जो कहीं भी डबल इंजन सरकार के द्वारा दिखाई नहीं दे रहा है इन्होंने कहा कि अफसोस की बात है की दिल्ली ,मुंबई ,गुजरात, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु जैसे राज्यों में काम करने वाले मजदूरों को अपने घर आने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार ने रेलवे का किराया नहीं दिया और मजदूर अपने किराया से या किसी और व्यवस्था से लोग काफी कठिनाई झेल कर भी अपने घर तक पहुंचे ,
लेकिन उन्हें सरकार की ओर से रोजगार उपलब्ध कराना तो दूर उन्हें तरह तरह की प्रताड़ना सहनी पड़ी ।जहां एक एक और केंद्र सरकार बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए कर्ज माफी योजना शुरू की। वहीं दूसरी ओर किसानों और मजदूरों को आत्मनिर्भर के नाम पर उन्हें पुलिसिया जुल्म और प्रताड़ना का शिकार बनाया गया ।भूखे पेट, नंगे पांव कैसे पहुंचे मजदूर अपने गांव यह बात मजदूर हमेशा याद रखेंगे। और चाहे जितना भी डबल इंजन सरकार जुमलेबाजी कर ले लोग अब मोदी- नीतीश के झांसे में आने वाले नहीं है और आने वाले चुनाव में सबक सिखाएंगे यह मजदूरों का संकल्प है।

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